नेता विपक्ष राहुल गांधी को क्या दलित होने की पीड़ा का पता है? क्या दलितों पर राजनीति कभी बंद होगी
राष्ट्रीय
वैसे यह भी तथ्य है कि रैली के बाद उस जगह का कथित शुद्धिकरण जाति विशेष के विरोध की वजह से नहीं हुआ है, अपितु राजनीतिक सोच के विरोध की सोच से हुआ है। जरूरी यह है कि समाज का सुधार करने की अगर किसी में इच्छा है तो वह संविधान निर्माता डॉ आंबेडकर की तरह जातिवाद का विरोध करे और जाति हीन समाज की सोच को आगे बढ़ाए। क्या किसी में इसका साहस है?